🔮📈📉फ्यूचर ट्रेडिंग स्पॉट ट्रेडिंग से ज्यादा लाभकारी क्यों है?फ्यूचर्स 🆚 स्पॉट ट्रेडिंग📶
लेवरेज उपलब्ध है
- फ्यूचर्स ट्रेडिंग में **लेवरेज** का उपयोग कर सकते हैं, यानी छोटी निवेश से बड़ा लाभ बना सकते हैं।
🆚 स्पॉट ट्रेडिंग में **जितने पैसे हैं, उतना ही ट्रेड कर सकते हैं।**
💸📊मार्केट दोनों दिशाओं में ट्रेड करने का विकल्प
- फ्यूचर्स में **लॉन्ग (खरीद)📈 और शॉर्ट (बेच)📉 दोनों संभव हैं, यानी मार्केट गिरे तब भी लाभ ले सकते हैं।
🆚 - स्पॉट ट्रेडिंग में सिर्फ खरीद सकते हैं, यानी मार्केट गिरे तो नुकसान होगा।
📈📉 हेजिंग का विकल्प
अगर किसी ने स्पॉट मार्केट में कॉइन्स होल्ड किए हैं, तो **फ्यूचर्स में शॉर्ट करके रिस्क मैनेज कर सकता है।**
-🆚 स्पॉट में सिर्फ लॉन्ग-टर्म होल्ड का विकल्प होता है, रिस्क मैनेजमेंट कम होती है।
📊उच्च तरलता
- फ्यूचर्स मार्केट में **ज़्यादा तरलता होती है**, यानी प्राइस जल्दी मूव होती है और जल्दी एंट्री/एक्जिट कर सकते हैं।
🆚 स्पॉट में तरलता कम होती है, खासकर लो-वॉल्यूम कॉइन्स में।
🐋🐳 प्राइस मैनिपुलेशन का फायदा**
- फ्यूचर्स में व्हेल्स और बड़े ट्रेडर्स प्राइस मैनिपुलेट करते हैं, लेकिन अगर टेक्निकल एनालिसिस समझ आए तो **उनके साथ ट्रेड करके लाभ ले सकते हैं🤑
🆚 स्पॉट में मैनिपुलेशन का प्रभाव ज्यादा होता है, लेकिन उसका फायदा लेना मुश्किल होता है।
💰 कम्पाउंडिंग प्रॉफिट्स संभव हैं💰
🔸 लेवरेज की वजह से छोटी कैपिटल से बड़ा लाभ संभव है, जो स्पॉट में नहीं होता।
🔸 दैनिक छोटे लाभ को रिइन्वेस्ट करके जल्दी पोर्टफोलियो बढ़ा📈 सकते हैं।
✅क्रिप्टो होल्ड करने की जरूरत नहीं🔮
- फ्यूचर्स में क्रिप्टो खरीदने की जरूरत नहीं, सिर्फ कॉन्ट्रैक्ट्स ट्रेड होते हैं।
- स्पॉट में वास्तविक क्रिप्टो खरीदना पड़ता है, जो वॉलेट सुरक्षा का मुद्दा बना सकता है।
🔍निष्कर्ष:
अगर टेक्निकल एनालिसिस और रिस्क मैनेजमेंट समझ हो, तो फ्यूचर्स ट्रेडिंग स्पॉट से ज्यादा लाभकारी है।✅💲
आप कौन सी ट्रेडिंग ज्यादा बेहतर समझते हैं, कमेंट में ज़रूर शेयर करें।
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